मुस्लिम समाज ने इस बार ईद पर रचा इतिहास

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देशभर में मनाया गया ईद का त्योहार हर्ष और उल्लास के साथ, लेकिन दिल्ली के मुस्लिम भाइयों ने दिल जीत लिया
प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी ईद का त्यौहार देश भर में उत्साह और उमंग के साथ मनाया गया हे. देश की राजधानी में ईद का त्योहार इस बार विशेष महत्व का और बेहद खास रहा क्योंकि केवल मस्जिदों और अधिकृत स्थलों में ही नमाजियों के नवाज अदा की गई थी .
संभवत: ऐसा पहली बार हुआ है कि दिल्ली की सड़कों पर किसी भी मुस्लिम भाई के द्वारा ना तो नवाज अदा करने की कोशिश की गई और ना ही किसी संस्था के द्वारा कार्य किया गया ऐसा प्रयास किया गया. निश्चित रूप से मुस्लिम भाइयों को बधाई  देना चाहिए कि उन्होंने सामाजिक सौहार्दपूर्ण वातावरण को बनाने में अपना योगदान दिया है.
इसकी पृष्ठभूमि में दिल्ली के राज्यपाल के विशेष प्रयास सराहनीय हैं जिन्होंने दिल्ली के मुस्लिम संगठनों के प्रतिनिधियों को और इमामों से वार्ता की और यह  कोशिश की गई थी कि नमाज के लिए मस्जिदों में शिफ्ट के हिसाब से स्थान सुनिश्चित किया जाए. दिल्ली के जामा मस्जिद के इमाम के द्वारा भी इसी तरह के प्रयास किए गए जिसकी भी तारीफ की जानी चाहिए.
सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह रहा कि दिल्ली के मुस्लिम समुदाय ने समझदारी, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के एहसास के दिल्ली के उपराज्यपाल का विनम्र आग्रह स्वीकार किया और अपने धर्म गुरुओं की बात को भी महत्व दिया.
दिल्ली के समाचार पत्रों ने इस बात पर मोहर लगाई है कि यदि कोई भी कार्य समझदारी, समन्वय और संवाद के साथ किया जाए कोई भी कठिन कार्य आसानी से किया जा सकता है. यदि सभी धर्म के अनुयायियों के द्वारा सद्भावना का वातावरण तैयार किया जाता है और आम आदमी  परेशान ना हो इसका ध्यान किया जाता है तो यही एक सच्ची इबादत है।
सभी नागरिकों को यह भी समझना होगा कि सड़क परिवहन के लिए होती है.  फुटपाथ पैदल चलने वालों के लिए होता है ना की किसी धार्मिक आयोजन के लिए और ना अतिक्रमण के लिए।
विरेंद्र कुमार जाटव,

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